क्या बौद्ध धर्म में छुआछूत है?

बौद्ध धर्म में छुआछूत या जाति प्रथा जैसी कोई बात नहीं है। यह धर्म सभी मनुष्यों को समान मानता है, चाहे वह किसी भी वर्ग या पृष्ठभूमि से क्यों न हो। गौतम बुद्ध ने अपने समय में जाति व्यवस्था का सख्त विरोध किया था और सभी के लिए धर्म के द्वार खोल दिए थे।

इसी कारण सदियों से कई ऐसे लोगों ने बौद्ध धर्म को अपनाया है, जो समाज में दलित या उपेक्षित माने जाते थे। उनके लिए बौद्ध धर्म ने न केवल आध्यात्मिक शांति का मार्ग खोला, बल्कि समानता और सम्मान का भी अहसास कराया।

6 दिसंबर, 2018 को हुए एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में भी यह बात साफ हुई कि लाखों लोगों ने बौद्ध धर्म अपनाने का कारण यही बताया — कि इस धर्म में कोई छुआछूत नहीं है।

बौद्ध धर्म केवल धार्मिक विश्वास ही नहीं, बल्कि एक ऐसा जीवन मार्ग है जो सहिष्णुता, दया और समानता पर आधारित है। यही कारण है कि आज भी लोग इस धर्म की ओर आकर्षित होते हैं, खासकर वे जो सामाजि

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