बौद्ध धर्म में विवाह की पवित्र पद्धति
बौद्ध धर्म में विवाह कोई कानूनी या धार्मिक अनिवार्यता नहीं है, लेकिन फिर भी यह एक पवित्र संस्कार के रूप में मनाया जाता है। यहां शादी की रस्में सादगी, आध्यात्मिकता और बुद्ध की शिक्षाओं पर आधारित होती हैं।
विवाह समारोह की शुरुआत बुद्ध पूजा से होती है। वर-वधु, उनके परिजन और समाज के सदस्य विवाह मंच के सामने एक विशेष पूजा वेदिका स्थापित करते हैं। इसके समक्ष वे दीपक जलाते हैं, अगरबत्ती या धूप लगाते हैं और खुशबूदार फूल अर्पित करते हैं। यह सब कुछ शुद्धता, आदर और आभार के प्रतीक के रूप में किया जाता है।
इसके बाद, तीन बार पंचांग प्रणाम किया जाता है—यानी वर-वधु बुद्ध, धर्म और संघ के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए झुकते हैं। यह क्रिया उनके जीवन में बुद्ध के मार्ग पर चलने के संकल्प को दर्शाती है।
कोई विशेष मंत्र न होने के बावजूद, भिक्षु या बौद्ध गुरु प्रायः धम्म की शिक्षाओं से जुड़े उपदेश
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