बुद्ध कैसे बने सिद्धार्थ?

सिद्धार्थ गौतम का जन्म एक राजपरिवार में हुआ था। उनके पिता शाक्य समुदाय के राजा थे और उन्होंने सिद्धार्थ को हर तरह के सुख-सुविधाओं के बीच पाला। लेकिन जैसे ही सिद्धार्थ ने बाहर की दुनिया को देखा — वृद्धता, बीमारी, मृत्यु और संन्यासी को देखकर — उनके मन में सवाल उठे: "जीवन में दुख क्यों है? इससे छुटकारा कैसे मिल सकता है?"

एक रात, जब उनकी पत्नी यशोधरा और नवजात बेटा राहुल सो रहे थे, सिद्धार्थ ने राजमहल छोड़ दिया। वे केवल अपने घोड़े कंथक के साथ जंगल की ओर चल दिए, ज्ञान की खोज में। वर्षों तक उन्होंने कठोर तपस्या की, लेकिन संतुष्टि नहीं मिली।

अंततः, बिहार के बोधगया में, एक पीपल के पेड़ (बोधि वृक्ष) के नीचे, सिद्धार्थ ने ध्यान लगाया और सच्चाई का अनुभव किया। उसी क्षण उन्हें दिव्य ज्ञान प्राप्त हुआ। वे अब सिद्धार्थ गौतम नहीं रहे — वे बुद्ध बन गए, अर्थात "जागृत व्यक्ति"।

उन्होंने समझा कि दुख का मूल कामना है,

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