श्रीकृष्ण को माखन-रोटी से है प्रेम

भगवान श्रीकृष्ण के प्रसिद्ध बचपन की कथाओं में उनका माखन चुराने का प्रसंग सबसे ज्यादा प्रिय माना जाता है। गोकुल और बृन्दावन में बचपन में वह माखन के लिए इतने मशहूर हुए कि आज भी उन्हें 'मखना चोर' के नाम से पुकारा जाता है। इसी से स्पष्ट होता है कि दूध के महत्व के बावजूद, श्रीकृष्ण को माखन-रोटी में विशेष आकर्षण था।

माखन-रोटी क्यों खास?

ग्रामीण संस्कृति में माखन-रोटी सादगी और स्नेह का प्रतीक है। यह न सिर्फ स्वादिष्ट है, बल्कि गाय के दूध से निकले माखन में आध्यात्मिक शुद्धता भी मानी जाती है। प्रसिद्ध लोककथाओं में यशोदा मैया माखन के घड़े ऊपर रखती थीं, लेकिन कृष्ण अपने सखाओं के साथ झूलों बनाकर चढ़ जाते और घड़ा तोड़कर माखन चुरा लेते।

कई भजनों और कीर्तनों में भी कृष्ण के माखन के प्रति प्रेम का वर्णन किया गया है। आज भी जन्माष्टमी और माखन मिसरी का भोग लगाकर उनकी पूजा की जाती है।

अंतर क्या है?

दूध शुद्धता

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