श्रीकृष्ण की माँ से शिकायत
बाल लीलाओं के दौरान श्रीकृष्ण अक्सर अपनी माँ यशोदा के पास आते थे — कभी शरारत की रिपोर्ट लगाने, कभी बखूबी ढूंढी हुई शिकायतें लेकर। एक बार वे बहुत उदास होकर आए और माँ से बोले, "मैं खेलने भी नहीं जा रहा, बलराम बहुत चिढ़ाते हैं!"
कृष्ण ने बताया कि बलदेव उन्हें बार-बार कहते हैं कि वे यशोदा के असली बेटे नहीं हैं, बल्कि कहीं से मोल लिए गए हैं। यह सुनकर कृष्ण को बहुत दुख होता है। बच्चों की दुनिया में भी एक छोटी सी बात बड़ा घाव कर सकती है। वे अपनी माँ की गोद में सिर रखकर सहारा चाहते हैं — न कि बस ढांढस बंधाने के लिए, बल्कि प्यार की पुष्टि चाहिए थी।
यशोदा माँ ने उन्हें गले लगा लिया होगा, चुप कराया होगा और शायद एक झूठी डांट भी दी होगी। यही तो उनकी लीला की खूबसूरती है — भगवान होने के बावजूद वे एक साधारण बच्चे की तरह दुख, गुस्सा और प्यार को महसूस करते हैं। और यशोदा की ममता उनके लिए सचमुच अनमोल है।
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