बाल कृष्ण की माखन-रोटी की लीला

भगवान श्रीकृष्ण के बाल लीला के किस्से आज भी दिल को छू जाते हैं। जब वे मथुरा या द्वारका के स्वरूप में नहीं, बल्कि गोकुल के माखन चोर बाल गोपाल के रूप में याद किए जाते हैं, तो दिल में एक अजीब सी मिठास छा जाती है।

बहुत से लोग सोचते हैं कि बाल कृष्ण को दूध बहुत पसंद था, लेकिन सच तो यह है कि माखन-रोटी उनका विशेष प्रिय भोजन था। गोकुल की गलियों में यशोदा मैया जब रोटी सेंकती थीं और मक्खन लगाकर उसे अलमारी में रख देती थीं, तो वहीं शुरू हो जाती थी माखन चुराने की मस्ती।

कहते हैं, बाल कृष्ण छोटे-छोटे सखाओं के साथ मिलकर घर-घर के मक्खन के घड़े खंगाल लेते थे। उनके इस माखन प्रेम को देखकर गोपियाँ कभी नाराज़ होती थीं, तो कभी मुस्कुराकर उन्हें और माखन दे देती थीं।

आज भी जन्माष्टमी के दिन माखन चोर के इस रूप को याद करके घर-घर में माखन-रोटी का भोग लगाया जाता है। यह न केवल एक भोजन है, बल्कि श्रद्धा और प्रेम का प्रतीक ह

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