यशोदा और कृष्ण: एक अनमोल बंधन
भगवान कृष्ण के बाल लीला के प्रसंग में यशोदा माता का प्रेम अद्वितीय है। कभी कृष्ण मुन्नी बन जाते हैं, तो कभी नटखट लीला करके गोकुल में हलचल मचा देते हैं। ऐसे ही एक प्रसंग में, जब कृष्ण क्रोधित हो जाते हैं, तो यशोदा माता उन्हें शांत करने के लिए प्रेम और सच्चाई का सहारा लेती हैं।
“हे कृष्ण, मैं गोधन की कसम खाकर कहती हूँ, मैं ही तेरी माता और तुम मेरे पुत्र हो।”इन सरल शब्दों में छिपा है प्रेम का अथाह समुद्र। यशोदा माता ने न तो डांटकर, न भय दिखाकर, बल्कि अपने हृदय की गहराई से उतरे शब्दों से कृष्ण के हृदय को छुआ। गोधन (गायों) की कसम तब की जाती है जब कोई अपनी बात की पवित्रता और सच्चाई साबित करना चाहता है। इस कसम के माध्यम से यशोदा ने केवल मातृत्व का दावा नहीं किया, बल्कि प्रेम की अनुभूति को शब्द दे दिए।
कृष्ण, जो स्वयं भगवान हैं, फिर भी माँ के प्रेम में एक छोटा सा बालक बन जाते हैं। यह प्रसंग हमें सिखाता है कि सच्चा प्रेम, संबंधों की पवि
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