कृष्ण और ओखल की लीला
भगवान कृष्ण के बचपन की लीलाओं में ओखल का विशेष स्थान है। माता यशोदा अक्सर उन्हें उनकी शरारतों के कारण ओखल में बांध देती थीं। क्या यह सजा थी या प्रेम का अनोखा रूप—यह तो उनकी लीला का ही हिस्सा है। ओखल, जो आमतौर पर पत्थर या लकड़ी की बनी होती थी, घर में अनाज पीसने के काम आती थी। लेकिन कृष्ण के लिए वह एक खिलौने से कम नहीं थी।
जब भी माखन के मनमोहक स्वाद का लालच सताता, तो कृष्ण उस छींके तक पहुँचने के लिए ओखल का इस्तेमाल करते थे। बंधे होने के बावजूद, वे अपनी चतुराई से ओखल को ही सीढ़ी बना लेते थे और ऊपर लटके मक्खन के घड़े तक पहुँच जाते। कहते हैं, कई बार तो ओखल सहित घिसटते हुए वे दूर तक जा पहुँचते, जिससे यशोदा माँ को फिर उन्हें ढूँढ़ना पड़ता।
यह लीला सिर्फ एक बच्चे की शरारत नहीं, बल्कि प्रेम, चतुराई और निर्भीकता का प्रतीक है। कृष्ण ने दिखाया कि जब दिल में लक्ष्य हो, तो बंधन भी रास्ता बन जाते हैं। ओखल, जो बं
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