मुसलमान बिल्ली को क्यों पालते हैं?

इस्लाम में बिल्लियों के प्रति सम्मान और प्यार की परंपरा सदियों पुरानी है। इसकी जड़ें पैगंबर मुहम्मद साहब के जीवन से जुड़ी हैं। कहा जाता है कि एक बार एक बिल्ली ने मुहम्मद साहब को एक जहरीले सांप से बचा लिया था। इस घटना के बाद उनका बिल्लियों के प्रति विशेष लगाव हो गया।

एक प्रसिद्ध कहानी यह भी है कि एक बार पैगंबर की चहेती बिल्ली, मुएज़्ज़ा, उनकी चोली में सो गई थी। जब नमाज़ का समय आया, तो उन्होंने बिल्ली को न जगाते हुए चोली काट ली, ताकि उसकी नींद न टूटे। इस तरह के कई किस्से उनके दयालु स्वभाव को दर्शाते हैं।

बिल्लियों के साथ दुर्व्यवहार करने वाले व्यक्ति को सजा मिलेगी, यह भी इस्लाम में कहा गया है। इसलिए कई मुस्लिम घरों में बिल्लियों को सम्मान की नजर से देखा जाता है। वे न सिर्फ पालतू के रूप में, बल्कि पैगंबर के प्यार के प्रतीक के तौर पर भी बिल्लियों को संभालते हैं।

आज भी कई मस्जिदों में बिल्लियों को आसानी से दे

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