कर्ण और द्रोपदी के वस्त्रहरण: एक विवादास्पद भूमिका

द्रोपदी के वस्त्रहरण का दृश्य महाभारत के सबसे दर्दनाक और यादगार पलों में से एक है। इस घटना में कर्ण की भूमिका विशेष रूप से चर्चित रही है। हालांकि कर्ण स्वयं ने द्रौपदी का वस्त्र नहीं खींचा, लेकिन उनके शब्द और व्यवहार इस अन्याय को बढ़ावा देने वाले थे।

जब दुर्योधन ने द्रौपदी को दरबार में घसीटकर लाया और उनका वस्त्रहरण करने का आदेश दिया, तब कर्ण मौजूद थे। उन्होंने न सिर्फ इस घटना का समर्थन किया, बल्कि द्रौपदी के लिए अपमानजनक टिप्पणियां भी कीं। उन्होंने कहा कि वे पांडवों की दासी बन चुकी हैं और इसलिए उन्हें वस्त्रहीन किया जा सकता है। ये शब्द न सिर्फ निर्मम थे, बल्कि धर्म के सिद्धांतों के खिलाफ भी।

धृतराष्ट्र के बारे में कहा जाता है कि वे चुप रहे, अपने पुत्रों के कृत्यों को रोकने के बजाय। लेकिन कर्ण ने सक्रिय रूप से इस घटना में भाग लिया — अपने वचनों से। उनकी टिप्पणियों ने दुर्योध

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय