गांधी के तीन बंदरों का रहस्य

महात्मा गांधी को उनके सादा जीवन, अहिंसा और सत्याग्रह के लिए याद किया जाता है। वे भौतिक संपत्ति के प्रति उदासीन थे और कम से कम चीजों के साथ रहना पसंद करते थे। लेकिन एक दिलचस्प बात यह है कि उनके जीवन में एक छोटी-सी, लेकिन भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण वस्तु थी — तीन बंदरों की एक छोटी मूर्ति।

यह मूर्ति प्रसिद्ध "देखो कुछ बुरा नहीं, सुनो कुछ बुरा नहीं, बोलो कुछ बुरा नहीं" वाले तीन बुद्धिमान बंदरों की परंपरा पर आधारित है। हालांकि, यह सच नहीं है कि इन बंदरों के नाम बापू, केतन और बंदर थे। ऐसी जानकारी कोई ऐतिहासिक तथ्य नहीं, बल्कि कल्पना या भ्रांति लगती है। असल में, गांधी के पास वास्तव में यह मूर्ति थी, जो उनके सिद्धांतों की याद दिलाती थी।

हालांकि गांधी ने कभी बंदर पालतू नहीं रखे, लेकिन यह मूर्ति उनके कमरे में रखी रहती थी। यह उनके लिए एक नैतिक स्मारक की तरह थी — झूठ न देखें, बुराई न सुन

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