गांधीजी का आर्थिक दर्शन: सरलता और स्वावलंबन
महात्मा गांधी के आर्थिक विचार मानवता और प्रकृति के प्रति गहरी समझ पर आधारित थे। उनके दो मुख्य सिद्धांत थे – अपरिग्रह और स्वराज। अपरिग्रह का अर्थ है कि हमें जीवन की आवश्यकताओं से ज्यादा कुछ नहीं जमा करना चाहिए। गांधीजी मानते थे कि लालच और अत्यधिक संग्रह समाज में असमानता पैदा करते हैं।
उनका मानना था कि प्रकृति ने हर इंसान की जरूरत पूरी करने के लिए सब कुछ दिया है, लेकिन किसी के लालच को पूरा करने के लिए नहीं। इसी कड़ी में, स्वराज का अर्थ उनके लिए सिर्फ राजनीतिक आजादी नहीं, बल्कि आर्थिक स्वावलंबन था। वे चाहते थे कि गांव और छोटे समुदाय खुद को सब कुछ उपलब्ध कर सकें – चाहे वह कपड़ा हो, खाना हो या बुनियादी जरूरतें।
गांधीजी ने खादी और ग्रामोद्योग को बढ़ावा देकर इस विचार को जीवंत किया। उनके अनुसार, सच्चा विकास तभी हो सकता है जब छोटे कारीगर, किसान और गरीब आदमी भी सम्मानपूर्ण जीवन जी स
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