गांधीवादी विकास योजना: सरल जीवन, उच्च सोच
गांधीवादी विकास योजना की अवधारणा 1944 में आचार्य श्रीमन नारायण अग्रवाल द्वारा उनकी पुस्तक 'गांधीवादी योजना' में प्रस्तुत की गई थी। यह योजना महात्मा गांधी के विचारों पर आधारित है, जिसमें स्वावलंबन, ग्राम स्वराज्य और जीवन के सांस्कृतिक व आध्यात्मिक मूल्यों को प्राथमिकता दी गई है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति के भौतिक और सांस्कृतिक स्तर को संतुलित रूप से ऊँचा उठाना है। गांधीवादी मॉडल मानता है कि सच्चा विकास तभी संभव है जब लोगों को जीवन का एक बुनियादी स्तर मिले और उनके पास अपने जीवन यापन के साधन भी हों।
इस दृष्टि में कृषि के वैज्ञानिक विकास और ग्रामीण उद्योगों पर विशेष जोर दिया गया। कुटीर उद्योगों और छोटे पैमाने के ग्रामोद्योगों को बढ़ावा देकर गाँवों में रोजगार के अवसर पैदा करने की बात की गई। गांधी के अनुसार, बड़े उद्योगों के बजाय स्थ
टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दें।