असहयोग आंदोलन की शुरुआत: एक ऐतिहासिक प्रेरणा

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में असहयोग आंदोलन एक महत्वपूर्ण मोड़ था। यह आंदोलन औपनिवेशिक शासन के खिलाफ अहिंसक प्रतिरोध का प्रतीक बना। इसकी शुरुआत की जड़ें जून 1920 में इलाहाबाद में हुए एक ऐतिहासिक सर्वदलीय सम्मेलन में मिलती हैं। उस सम्मेलन में विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक समूहों ने मिलकर अंग्रेजी शिक्षा संस्थानों, कॉलेजों, न्यायालयों और सरकारी पदों के बहिष्कार का ऐलान किया।

इस सम्मेलन ने महात्मा गांधी को आंदोलन की बागडोर सौंपी। उनके नेतृत्व में यह आंदोलन जन-आंदोलन का रूप लेने लगा। 31 अगस्त 1920 को खिलाफत समिति ने औपचारिक तौर पर असहयोग अभियान की घोषणा की, जिसने पूरे देश में आम जनता के बीच राष्ट्रीय चेतना की लहर दौड़ा दी।

इस आंदोलन ने न केवल राजनीतिक जागृति फैलाई, बल्कि लाखों सामान्य नागरिकों को स्वराज की लड़ाई में सीधे जोड़ा। स्कूल-कॉलेज छोड़ने वाले छात्र, न्यायालय

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