अहिंसा परमो धर्म: शांति और धर्म की रक्षा

“अहिंसा परमो धर्मः, धर्म हिंसा तथैव च” — यह श्लोक महाभारत के अनुशासन पर्व से लिया गया है और भारतीय दर्शन की गहरी समझ देता है। इसका अर्थ है कि अहिंसा सबसे बड़ा धर्म है, लेकिन जब धर्म के स्वरूप पर खतरा हो, तो उसकी रक्षा के लिए की गई हिंसा भी धर्म का ही अंग होती है।

यह श्लोक यह नहीं कहता कि हिंसा स्वीकार्य है, बल्कि यह समझाता है कि धर्म की रक्षा के लिए कभी-कभी दुखद विकल्प भी लेने पड़ते हैं। भगवान कृष्ण ने अर्जुन को कुरुक्षेत्र के युद्ध में लड़ने के लिए प्रेरित किया था, क्योंकि अधर्म के खिलाफ खड़े होना भी धर्म का हिस्सा है।

अहिंसा को महानतम आचरण माना जाता है, चाहे वह महात्मा गांधी के अहिंसा आंदोलन में हो या जैन धर्म के सिद्धांतों में। लेकिन जब समाज, न्याय या धर्म के मूल सिद्धांतों पर आघात हो, तो उसकी रक्षा के लिए कदम उठाना भी धार्मिक कर्तव्य बन जाता है।

इस तरह, यह श्लोक संतुलन की बात करत

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