गांधी जी की विचारधारा: सत्य और अहिंसा का मार्ग
गांधी जी की विचारधारा, जिसे गाँधीवाद भी कहा जाता है, मानवता, नैतिकता और आध्यात्मिकता पर आधारित है। महात्मा गांधी ने अपना सारा जीवन सत्य, अहिंसा और नैतिक जीवन के सिद्धांतों पर चलकर बिताया। उनका मानना था कि बिना हिंसा के भी बड़े-से-बड़े बदलाव संभव हैं। इसी विश्वास के साथ उन्होंने भारत की आजादी की लड़ाई अहिंसक तरीकों से लड़ी।
गाँधीवाद केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं था, बल्कि यह सामाजिक न्याय, ग्राम स्वराज, स्वदेशी और धार्मिक सहिष्णुता में भी विश्वास करता था। गांधी जी चाहते थे कि हर गांव खुद-ब-खुद चल सके, और लोग सरल, ईमानदार जीवन जिएं। उन्होंने खादी को राष्ट्रीय आत्मसम्मान का प्रतीक बनाया और विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करने की अपील की।
सत्याग्रह उनकी विचारधारा का सबसे शक्तिशाली हथियार था। यह केवल एक राजनीतिक तकनीक नहीं, बल्कि एक जीवन शैली थी। गांधी जी का मानना था
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