महात्मा गांधी की नई तालीम: शिक्षा और काम का एकीकरण

महात्मा गांधी की सोच में शिक्षा सिर्फ पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं थी। उनके लिए शिक्षा वह थी जो जीवन की असली जरूरतों को पूरा करे। इसी विचार के तहत उन्होंने नई तालीम की अवधारणा प्रस्तुत की, जिसे अक्सर बुनियादी शिक्षा के नाम से भी जाना जाता है।

इस सिद्धांत का मूल विचार यह है कि ज्ञान और कार्य अलग-अलग नहीं हैं। गांधी जी मानते थे कि बच्चे सिर्फ पढ़-लिख कर ही नहीं, बल्कि हाथ से काम करके भी सीखते हैं। इसलिए उनकी नई तालीम में शिक्षा के साथ-साथ कला, कृषि, बुनाई, खेती जैसे व्यावहारिक कार्यों को भी जगह दी गई।

गांधी का मानना था कि ऐसी शिक्षा न केवल बच्चों को आत्मनिर्भर बनाती है, बल्कि समाज में समानता और सहयोग की भावना को भी बढ़ाती है। उनके लिए शिक्षा का मकसद परीक्षा पास करना नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार, सच्चरित्र और समाज के प्रति सजग नागरिक बनना था।

आज भी गांधी के इस विच

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