क्या महात्मा गांधी ब्रह्मचारी थे?

महात्मा गांधी के जीवन और आदर्शों पर अक्सर कई सवाल उठते हैं, और इनमें से एक यह भी है कि क्या वे ब्रह्मचारी थे। जवाब है—हाँ, लेकिन समझने की जरूरत है।

1906 में, गांधीजी ने ब्रह्मचर्य का व्रत लिया था। इसका मतलब था कि उन्होंने आध्यात्मिक शुद्धता, संयम और आत्म-नियंत्रण के लिए संसारिक सुखों, विशेषकर लैंगिक संबंधों से त्याग कर लिया। यह उनके वैवाहिक जीवन के बावजूद था। उनकी पत्नी कास्तूरबा के साथ उनका गहरा आदर और स्नेह था, लेकिन 1906 के बाद वे शारीरिक संबंध नहीं रखे।

ब्रह्मचर्य के पीछे गांधीजी का उद्देश्य केवल त्याग नहीं था, बल्कि आत्मशक्ति की खोज थी। उनका मानना था कि इंद्रियों पर नियंत्रण आत्मा की आवाज सुनने में मदद करता है। यही कारण था कि वे लंबे समय तक शाकाहार, एकांत वास और चुप्पी के माध्यम से अपने सिद्धांतों को जीते।

गांधीजी के ब्रह्मचर्य को कई लोग अजीब या कठोर समझते हैं, लेकिन यह उनके जीवन

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