गांधीजी और ब्रह्मचर्य की शपथ
महात्मा गांधी के जीवन के कई पहलू आज भी लोगों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उनमें से एक है उनकी ब्रह्मचर्य की शपथ। गांधीजी ने जब 38 साल की उम्र में इस शपथ को लिया, तब उनका जीवन पूरी तरह बदल चुका था।
दिलचस्प बात यह है कि उनकी शादी बहुत कम उम्र, महज 13 साल में हो गई थी। समय के साथ उन्होंने जीवन के बारे में गहरी समझ विकसित की। धीरे-धीरे उन्होंने महसूस किया कि आत्म-नियंत्रण और आध्यात्मिक शक्ति के लिए ब्रह्मचर्य एक महत्वपूर्ण साधन हो सकता है।
1906 में, दक्षिण अफ्रीका में रहते हुए, गांधीजी ने ब्रह्मचर्य की शपथ ली। यह केवल शारीरिक संयम नहीं था, बल्कि विचारों, कर्मों और जीवनशैली में पूर्ण संयम का प्रतीक था। उनके लिए यह एक आध्यात्मिक प्रतिबद्धता थी, जो उनके सत्य और अहिंसा के मार्ग में मददगार साबित हुई।
गांधीजी मानते थे कि ब्रह्मचर्य न केवल ताकत देता है, बल्कि मन को स्थिर और इच्छाओं पर नियंत्रण करने में सहायत
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