ब्रह्मचर्य क्या है?
ब्रह्मचर्य शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है – ब्रह्म और चर्य। ब्रह्म का अर्थ है परमात्मा या परम सत्य, और चर्य का अर्थ है चलना या विचरना। इस तरह ब्रह्मचर्य का सीधा अर्थ है – परमात्मा में निरंतर विचरना, उसके प्रति लगे रहना।
यह सिर्फ शारीरिक संयम नहीं है, बल्कि मन, वाणी और कर्म की शुद्धता पर आधारित एक जीवन शैली है। महाभारत के रचयिता महर्षि व्यास ने बताया है कि जब कोई व्यक्ति इंद्रियों के द्वारा मिलने वाले भौतिक सुखों को जानबूझकर, संयम के साथ त्याग देता है, तो वही ब्रह्मचर्य होता है।
आजकल बहुत से लोग ब्रह्मचर्य को सिर्फ शारीरिक दृष्टि से देखते हैं, लेकिन यह केवल एक पहलू है। असली ब्रह्मचर्य तो वह है जब मन लौकिक विषयों से हटकर आध्यात्मिक लक्ष्य की ओर लगा रहे। यह आत्म-नियंत्रण, संयम और ध्यान की स्थिति है।
प्राचीन काल में छात्र गुरुकुल में ब्रह्मचर्य व्रत लेकर ही शिक्षा ग्रहण करते थे। इसका उद्देश्य केवल ज्ञान प्र
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