गांधी जी को 'नमक चोर' क्यों कहा जाता है?

महात्मा गांधी को 'नमक चोर' कहे जाने का कारण 1930 में आयोजित दांडी मार्च है। उस समय अंग्रेज सरकार ने नमक पर पूर्ण नियंत्रण कर रखा था और उस पर भारी कर लगाया था। नमक बनाना या उसका उपयोग सरकारी अधिकारियों के बिना गैरकानूनी था। गांधी जी ने इस अन्याय के खिलाफ एक शांतिपूर्ण विरोध के तौर पर अहमदाबाद से दांडी तक की 240 मील लंबी पदयात्रा शुरू की।

इस यात्रा के अंत में गांधी जी ने समुद्र तट पर नमक का उत्पादन करके अंग्रेजी कानून तोड़ा। यह कार्यवाही भले ही छोटी लगे, लेकिन यह संपूर्ण व्यवस्था के खिलाफ एक प्रतीकात्मक विद्रोह थी। अंग्रेज सरकार ने उन पर चोरी का आरोप लगाते हुए कहा कि वे 'नमक चोर' हैं। लेकिन देश के लाखों लोगों ने इसे गौरव की बात समझा।

इस आंदोलन में न केवल किसान और मजदूर, बल्कि कस्बों के कारखानों में काम करने वाले लोगों ने भी हड़तालों के माध्यम से भाग लिय一方面। लाखों ने सरकारी नौकरियां त्याग दीं औ

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