गांधी जी के अनुसार स्वराज क्या है?

गांधी जी के लिए स्वराज का अर्थ केवल अंग्रेजों के शासन से मुक्ति पाना नहीं था, बल्कि यह जनता के हाथों में सत्ता होने की स्थिति थी। उनका मानना था कि सच्चा स्वराज तभी संभव है जब देश की जनता खुद अपने निर्णय ले सके और शासन उनकी आवश्यकताओं और आकांक्षाओं के अनुरूप चले।

गांधी जी के अनुसार, स्वराज सिर्फ एक राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि एक समग्र परिवर्तन था। वे चाहते थे कि भारत ब्रिटिश व्यवस्था के सभी पहलुओं — चाहे वह नौकरशाही हो, कानूनी प्रणाली हो, सैन्य ढांचा हो या शिक्षा प्रणाली — से दूर रहे। उन्होंने इन संस्थाओं का बहिष्कार करने का आह्वान किया, क्योंकि वे उपनिवेशवादी शोषण का हिस्सा थीं।

उनका स्वराज का सपना ग्राम स्वराज पर आधारित था, जहां हर गांव खुद-ब-खुद चल सके, जहां लोग सरल जीवन जिएं और स्वावलंबन पर जीवन बनाएं। उन्होंने चरखा, स्वदेशी और अहिंसा को इस स्वराज की नींव बनाया।

आज भी गांधी जी का स्वराज का विचार प

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