“स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है” – एक ऐतिहासिक नारा
“स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है” – यह नारा भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में सबसे प्रेरणादायक क्षणों में से एक है। इस ऐतिहासिक उद्घोष को बाल गंगाधर तिलक ने 1916 में दिया था। तिलक न केवल एक राष्ट्रवादी नेता थे, बल्कि एक विचारक, शिक्षाविद और लेखक भी थे, जिन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी।
उन्होंने यह बात इसलिए कही, क्योंकि वे चाहते थे कि आम जनता को ये एहसास हो कि अंग्रेजों के बिना अपना देश स्वयं चलाना सिर्फ एक सपना नहीं, बल्कि उनका अधिकार है। तिलक की यह आवाज़ उस समय के भारतीयों के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा बन गई।
1916 में, जब उन्होंने यह नारा दिया, तब देश में राजनीतिक चेतना धीरे-धीरे जाग रही थी। तिलक के इस कथन ने न सिर्फ आम आदमी को जगाया, बल्कि बाद के नेताओं, जैसे महात्मा गांधी और सुभाष चंद्र बोस के विचारों को भी प्रभावित किया।
आज भी, यह वाक्य
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