तिलक के शिक्षा के प्रति विचार

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के शिक्षा के प्रति विचार उनके राष्ट्रवादी सोच का हिस्सा थे। वे मानते थे कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि वह ऐसी हो जो युवाओं को आत्मनिर्भर बनाए।

भारत की विशाल जनसंख्या और ग्रामीण आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए तिलक ने तकनीकी शिक्षा और स्थानीय व्यवसायों के महत्व पर जोर दिया। उनका मानना था कि शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ नौकरी पाना नहीं, बल्कि स्वरोजगार के अवसर पैदा करना भी होना चाहिए।

तिलक ने गांधी के समान इस बात पर बल दिया कि भारत की शिक्षा प्रणाली में कुटीर उद्योग, हस्तशिल्प, कृषि और तकनीकी कौशल जैसे विषयों को भी स्थान दिया जाए। उनके अनुसार, ऐसी शिक्षा ही देश को आर्थिक रूप से मजबूत बना सकती है और विदेशी निर्भरता से मुक्ति दिला सकती है।

तिलक के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। जब देश रोजगार की मांग कर रहा है, तब उनकी वह सोच, जो शिक्षा में

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