गांधी जी की धार्मिक सोच: सीमाओं से परे

क्या महात्मा गांधी मुस्लिम थे? यह सवाल कई बार सुनने को मिला है। लेकिन असलियत यह है कि गांधी जी न केवल एक धर्म के अनुयायी थे, बल्कि सभी धर्मों के प्रति गहरा सम्मान रखते थे। उनका कहना था, “हाँ मैं हूँ। मैं एक ईसाई, मुस्लिम, बौद्ध और यहूदी भी हूँ।”

गांधी जी का यह उद्धरण उनकी विश्व-व्यापी धार्मिक सोच को दर्शाता है। वे हिंदू थे, लेकिन उनका धर्म केवल एक नाम नहीं, बल्कि मानवता के प्रति प्रेम था। वे मानते थे कि सच्चा धर्म मनुष्यता की सेवा है। उन्होंने कई बार कहा था कि धर्म वह नहीं जो हम कहते हैं, बल्कि वह है जो हम करते हैं।

उन्होंने कुरान, बाइबल और गीता का अध्ययन किया और सभी में एक ही सत्य ढूंढ़ा — प्रेम, सत्य और अहिंसा। उनके लिए धर्म की सीमाएं नहीं थीं। वे हर धर्म में अपने आप को देखते थे। इसीलिए वे कह सके कि वे एक मुस्लिम भी हैं — क्योंकि इस्लाम का संदेश भी प्रेम, नम्रता और ईमानदारी का है।

गांधी जी की

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