स्वराज पार्टी की स्थापना: एक ऐतिहासिक कदम
भारत के स्वतंत्रता संग्राम में स्वराज पार्टी का गठन एक महत्वपूर्ण मोड़ था। 1 जनवरी, 1923 को देशबन्धु चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू ने मिलकर इस पार्टी की स्थापना की।
इस दल का उद्देश्य अंग्रेजी शासन के भीतर रहकर ही उसकी नीतियों का विरोध करना था। स्वराज पार्टी के नेता मानते थे कि ब्रिटिश संसदीय प्रणाली में भाग लेकर भारतीयों की आवाज बुलंद की जा सकती है। उन्होंने विधान परिषदों और विधान सभाओं में प्रवेश करके सरकारी नीतियों को चुनौती देने का फैसला किया।
चित्तरंजन दास, जिन्हें ‘देशबन्धु’ के नाम से जाना जाता था, पार्टी के पहले अध्यक्ष बने। मोतीलाल नेहरू, जो स्वतंत्रता सेनानी और एक कुशल वकील थे, पार्टी के प्रमुख रणनीतिकार बने। उनका मानना था कि गांधी जी के अहिंसा और सत्याग्रह के मार्ग के साथ-साथ संस्थागत स्तर पर लड़ाई भी जारी रखनी चाहिए।
स्वराज पार्टी ने 1923 के बाद के चुनावों में शानदार प्रदर्शन किया और कई प्रां
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