माता यशोदा का पिछला जन्म
माता यशोदा, भगवान श्रीकृष्ण की वास्तविक माता के रूप में तो हम सबके हृदय में बसी हैं ही, लेकिन क्या आप जानते हैं कि उनके पिछले जन्म का भी एक अद्भुत रहस्य है?
एक बार एक साध्वी स्त्री, जिनका नाम धरा था, ने भगवान ब्रह्मा से प्रार्थना की — “जब भी मैं पृथ्वी पर जन्म लूं, भगवान श्रीकृष्ण में मेरी अविचल भक्ति हो।” ब्रह्माजी ने उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर ‘तथास्तु’ कहा और उन्हें यह वरदान दिया।
इसी वर के प्रभाव से, ब्रज में सुमुख नामक गोप की पत्नी पाटला के गर्भ से धरा का जन्म हुआ, और वही इस जन्म में माता यशोदा बनीं। इस तरह, भक्ति के बल पर एक साधारण स्त्री भगवान कृष्ण की माँ बनी — न केवल देह से, बल्कि हृदय से भी।
माता यशोदा की कथा सिर्फ एक जन्म-कथा नहीं, बल्कि भक्ति की पराकाष्ठा है। उनका प्रेम, निस्वार्थ था। उनकी गोद में जब कृष्ण मुस्कुराते, तो पूरा ब्रज झूम उठता। और आज भी, वह प्रेम हर भक्त के मन में जीवित है।
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