विस्तृत लेख भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में 'श्रुति' शब्द का क्या वास्तविक अर्थ और महत्व है?

श्रुति क्या है और सनातन धर्म में इसका क्या महत्व है?

श्रुति का शाब्दिक अर्थ होता है — "सुना हुआ"। प्राचीन भारतीय परंपरा में श्रुति उस पवित्र और अलौकिक ज्ञान को कहा जाता है, जिसे प्राचीन काल में ऋषियों ने गहरे ध्यान और साधना के दौरान सीधे अनुभव या सुना था। चूंकि यह ज्ञान किसी मनुष्य की रचना नहीं है, इसलिए इसे ईश्वर की वाणी और 'अपौरुषेय' माना जाता है।

प्राचीन काल में जब ग्रंथों को लिखने की परंपरा नहीं थी, तब इस दिव्य ज्ञान को सहेजने के लिए मौखिक माध्यम अपनाया गया। गुरु अपने शिष्यों को इसका उच्चारण करके सुनाते थे और शिष्य इसे ध्यानपूर्वक सुनकर याद कर लेते थे। इसी कारण इस ज्ञान को पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुनकर आगे बढ़ाया गया और पूरे संसार में फैलाया गया।

चारों वेद — ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद — तथा उपनिषद श्रुति साहित्य के ही मुख्य भाग हैं। अपने दिव्य और प्रामाणिक स्रोत के कारण ही श्रुति को धर्म का सबसे महत्त्वपूर्ण और प्राथमिक स्रोत माना गया है। यह ज्ञान आज भी भारतीय दर्शन, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा का सबसे मजबूत आधार बना हुआ है।

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय