उत्तर प्रदेश पर कर्ज का बोझ: 2017 से अब तक का लेखा-जोखा

उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और उस पर बढ़ते कर्ज का मुद्दा हमेशा से राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय रहा है। राज्य के विकास, बुनियादी ढांचे के निर्माण और जन कल्याणकारी योजनाओं को संचालित करने के लिए सरकारों को वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होती है, जिसके लिए अक्सर कर्ज लिया जाता है।

वर्ष 2017 में जब योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की सत्ता संभाली, उस समय उत्तर प्रदेश पर कुल 4,73,348.2 करोड़ रुपये का कर्ज था। इसके बाद के वर्षों में राज्य के वित्तीय आंकड़ों में लगातार बदलाव देखने को मिला।

अगले ही वर्ष यानी 2018 में यह कर्ज बढ़कर 5.17 लाख करोड़ रुपये हो गया। विकास कार्यों की गति के साथ वर्ष 2019 में कर्ज की यह राशि 5.67 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई। हालांकि वर्ष 2020 में इसमें थोड़ी कमी दर्ज की गई और यह 5.49 लाख करोड़ रुपये पर आया, लेकिन यह राहत ज्यादा वक्त तक नहीं रही।

वर्ष 2021 के संशोधित अनुमानों में उत्तर प्रदेश पर कुल कर्ज का आंकड़ा पहली बार 6.0 लाख करोड़ रुपये के पार निकल गया। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि राज्य में विकास योजनाओं के विस्तार के साथ-साथ वित्तीय प्रबंधन और बढ़ते कर्ज को संतुलित रखना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती रहा है।

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