अंग्रेजों ने भारत क्यों छोड़ा? आर्थिक और राजनीतिक कारण

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर हो चुकी थी। लंबे समय तक शासन करने के बाद, ब्रिटिश सरकार के लिए भारत को एक उपनिवेश के रूप में संभाले रखना आर्थिक रूप से लाभहीन साबित होने लगा था। भारतीय साम्राज्य से अब अंग्रेजों को वह राजस्व और व्यापारिक लाभ नहीं मिल पा रहा था, जिसकी वे अपेक्षा करते थे।

इसके साथ ही, भारत में स्वतंत्रता आंदोलन अपने चरम पर था। महात्मा गांधी का 'भारत छोड़ो आंदोलन', आजाद हिंद फौज की गतिविधियां और 1946 का शाही भारतीय नौसेना विद्रोह जैसी घटनाओं ने अंग्रेजों को यह अहसास करा दिया कि अब भारतीय जनता पर नियंत्रण बनाए रखना असंभव है। भारतीय प्रशासन को चलाना ब्रिटिश सरकार के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन चुका था।

ऐसी स्थिति में ब्रिटिश शासकों ने समझदारी दिखाते हुए स्वेच्छा से भारत को स्वतंत्र करने का निश्चय किया। उनका मानना था कि सम्मानजनक तरीके से सत्ता का हस्तांतरण करने से वे नई भारतीय सरकार और भारतीयों की सहानुभूति और सद्भावना प्राप्त कर सकेंगे, जिससे भविष्य में व्यापारिक संबंध बनाए रखे जा सकें। इस प्रकार, घटते आर्थिक लाभ, बढ़ते प्रशासनिक दबाव और जन-आंदोलन के संयुक्त प्रभाव के कारण अंग्रेजों ने भारत छोड़ने का फैसला किया।

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