अंग्रेजों का भारत में आगमन: व्यापार से सत्ता तक का सफर
भारत के इतिहास में 24 अगस्त 1608 की तारीख बेहद मायने रखती है। इसी दिन ईस्ट इंडिया कंपनी का पहला जहाज सूरत के बंदरगाह पर उतरा था। अंग्रेजों का शुरुआती मकसद भारत के साथ सिर्फ व्यापार करना और यहाँ की धन-दौलत से मुनाफा कमाना था। उस समय भारत मसाले, सूती कपड़े और रेशम के उत्पादन में दुनिया भर में प्रसिद्ध था, जो विदेशी व्यापारियों को आकर्षित करता था।
व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ाने के लिए अंग्रेजों को यहाँ के स्थानीय शासकों से अनुमति की जरूरत थी। इसी सिलसिले में सन 1615 में ब्रिटेन के राजा ने सर थॉमस रो को अपना राजदूत बनाकर मुगल सम्राट जहांगीर के दरबार में भेजा। थॉमस रो अपनी कूटनीति में सफल रहे और उन्हें व्यापार करने तथा कारखाने स्थापित करने की शाही अनुमति मिल गई।
जिस सूरत से अंग्रेजों ने व्यापार की शुरुआत की थी, वही आगे चलकर उनके राजनीतिक मंसूबों का केंद्र बन गया। धीरे-धीरे उन्होंने अपनी सैन्य शक्ति और कूटनीतिक चालों से भारत के विशाल भूभाग पर कब्जा जमा लिया। व्यापार के इरादे से आया एक व्यापारी समूह अंततः भारत का शासक बन बैठा और देश को लंबे समय तक गुलामी की जंजीरों में जकड़े रखा।
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