आकाश से भी बड़ा कौन?
कभी सोचा है कि आकाश से भी बड़ा कौन हो सकता है? हम तो आकाश को अनंत, विशाल और अपार मानते हैं। लेकिन महाभारत के एक प्रसंग में युधिष्ठिर ने इस प्रश्न का ऐसा उत्तर दिया, जो आज भी हमारे मन को छू जाता है।
एक बार यक्ष ने युधिष्ठिर से पूछा था – “आकाश से भी बड़ा कौन है?” और युधिष्ठिर का जवाब था – “पिता”। यह उत्तर सुनकर शायद कोई हैरान हो सकता है, लेकिन इसके पीछे गहरा अर्थ छिपा है।
पिता केवल एक व्यक्ति नहीं, एक भूमिका है – जो संयम, त्याग और प्रेम का प्रतीक है। वह वही है जो बिना कुछ माँगे अपने बच्चे के लिए सब कुछ देता है। वह वही है जो अपने बच्चे के भविष्य के लिए अंधेरे में भी रास्ता दिखाता है।
इसलिए आकाश चाहे कितना भी विशाल क्यों न हो, पिता की छाया उससे भी बड़ी होती है। उसका प्रेम, उसकी जिम्मेदारी और उसका त्याग – ये वे गुण हैं जो किसी अनंत आकाश से भी परे हैं।
ब्रजेश कुमार, सासाराम द्वारा 16 जून 2012 को इ
टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दें।