यात्रा का अर्थ

एक सवाल पूछा गया—आदमी को कूच करने के लिए क्या चाहिए? इसका जवाब सीधा तो है, लेकिन गहरा भी है। लेखक और उसका मित्र एक बस में सफर कर रहे हैं। यह बस केवल एक वाहन नहीं है, बल्कि एक रूपक भी है। जैसे जीवन एक यात्रा है, वैसे ही हर यात्री को किसी साधन की आवश्यकता होती है ताकि वह आगे बढ़ सके।

यहाँ 'कूच करने' का अर्थ सिर्फ एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना नहीं है, बल्कि जीवन की अंतिम यात्रा की ओर भी इशारा है। मृत्यु—वह अंतिम कदम, जिसके लिए भी मनुष्य को एक ‘साधन’ चाहिए। कभी-कभी वह साधन एक बस बन जाती है, जो उसे दुनिया के आखिरी पड़ाव तक ले जाती है।

लेखक की नजर में यह बस केवल यात्रा नहीं, बल्कि जीवन और मृत्यु के बीच की लाइन को छूती है। यात्री बस में बैठे हैं, बातें कर रहे हैं, हंस रहे हैं—पर सभी का अंतिम मंजिल एक ही है। इस सच्चाई को स्वीकार करने की हिम्मत कम ही लोगों में होती है।

यह घटना 29 सितंबर 2020 की है, लेकिन इसका संदेश सद

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