कितने बच्चे होने चाहिए: एक आम भारतीय परिवार के लिए क्या सही है?

कई सालों से, भारत में दो बच्चे, बेहतर परिवार की तस्वीर बनी रही है। चाहे मीडिया हो या सामाजिक बातचीत, आमतौर पर यही माना जाता रहा है कि एक संतुलित परिवार में दो बच्चे होने चाहिए। शोध भी इस बात को समर्थन देते हैं—अधिकांश लोग दो बच्चों को 'आदर्श' मानते हैं। इसे अक्सर संतुलन का प्रतीक माना जाता है: न बहुत बड़ा परिवार, न बहुत छोटा।

लेकिन समय बदल रहा है। आज, शहरी क्षेत्रों में खासकर, एक बच्चे वाले परिवारों की संख्या में धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो रही है। कारण भी साफ हैं—जीवन की बढ़ती लागत, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च, और करियर के प्रति समर्पन। कई दंपति अब गहराई से सोचते हैं कि क्या एक बच्चे पर ध्यान केंद्रित करना बेहतर नहीं है।

हालांकि, यह फैसला पूरी तरह व्यक्तिगत है। कुछ परिवार पारंपरिक मूल्यों पर विश्वास करते हैं और बड़े परिवार को पसंद करते हैं, तो कुछ छोटे परिवार को नई जिंदग

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