इंग्लैंड में हिंदुओं की बढ़ती आबादी और प्रभाव

ब्रिटेन में भारतीय समुदाय का इतिहास काफी पुराना रहा है, लेकिन बीते कुछ दशकों में यहाँ हिंदुओं की आबादी में एक बड़ा उछाल देखा गया है। सांस्कृतिक विविधता से भरे इस देश में हिंदू समुदाय ने न केवल अपनी अलग पहचान बनाई है, बल्कि वहाँ की अर्थव्यवस्था और समाज में भी बेहद महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

अगर सरकारी आंकड़ों की बात करें, तो साल 2001 की जनगणना के दौरान इंग्लैंड और वेल्स में हिंदुओं की कुल संख्या लगभग 5,52,421 थी। हालांकि, समय के साथ पढ़ाई, नौकरियों और व्यापार के सिलसिले में भारत से ब्रिटेन जाने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ती गई। इसका सीधा असर जनसांख्यिकी पर पड़ा और साल 2011 में हुई जनगणना तक यह आंकड़ा बढ़कर 8,16,633 पहुँच गया, जो उस समय ब्रिटेन की कुल आबादी का लगभग 1.5 फीसदी था।

इंग्लैंड के बड़े शहरों जैसे लंदन, लेस्टर, और बर्मिंघम में हिंदू समुदाय की बड़ी आबादी निवास करती है। लेस्टर जैसे शहरों में तो भारतीय त्योहारों, विशेषकर दिवाली, की रौनक देखने लायक होती है, जिसे भारत से बाहर सबसे बड़े आयोजनों में गिना जाता है। लंदन का प्रसिद्ध नेस्डन मंदिर (BAPS श्री स्वामीनारायण मंदिर) वहाँ की धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का एक प्रमुख केंद्र है।

हाल के वर्षों में हुए बदलावों को देखें तो इंग्लैंड में हिंदुओं की संख्या सिर्फ बढ़ ही नहीं रही है, बल्कि राजनीति, व्यापार, चिकित्सा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी इस समुदाय के लोग प्रमुख भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। भाषा और संस्कृति को सहेजते हुए, यहाँ रहने वाले हिंदू स्थानीय समाज का एक अटूट और मजबूत हिस्सा बन चुके हैं।

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