सत्य और असत्य का संगम
इस दुनिया में सत्य क्या है? यह प्रश्न सदियों से मनुष्य के मन में उठता रहा है। क्या सच वही है जो हम देखते हैं? या फिर वह कुछ और है, जो हमारी आत्मा में छिपा है? वास्तविकता यह है कि यहाँ सब कुछ सत्य है — हर छोटी-बड़ी घटना, हर भावना, हर पल। लेकिन इस सत्य के भीतर असत्य का अस्तित्व भी झलकता है।
जीवन और मृत्यु का चक्र ही इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। हम जन्म लेते हैं, जीते हैं, और एक दिन चले जाते हैं। यह क्रम सत्य है। लेकिन इस रास्ते में हम झूठ, छल, स्वार्थ जैसे असत्यों का सामना करते हैं। क्या यह असत्य वाकई असत्य है? या फिर यह सत्य का ही एक पहलू है?जीवन में बचे रहने की प्रवृत्ति सबसे शक्तिशाली है। इसी के चलते कभी-कभी मनुष्य असत्य का सहारा लेता है। लेकिन यह भी सत्य का ही हिस्सा है। क्योंकि बचना भी तो एक सत्य है।
असली सत्य यह है कि सत्य और असत्य दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। एक के बिना दूसरे की कल्पना नहीं की जा सकती। जब हम
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