उज्जैन: पृथ्वी की नाभि और भारत का ग्रीनविच

उज्जैन, मध्य प्रदेश का एक प्राचीन शहर, सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि खगोलीय और भौगोलिक दृष्टि से भी विशेष स्थान रखता है। प्राचीन ग्रंथ सूर्य सिद्धांत, जो चौथी शताब्दी का है, के अनुसार उज्जैन वही सटीक स्थान है जहां देशांतर का शून्य मेरिडियन और कर्क रेखा एक-दूसरे को काटते हैं।

इसी विशेष स्थिति के कारण प्राचीन काल में इसे पृथ्वी की नाभि माना जाता था। यह विश्वास न सिर्फ धार्मिक महत्व से जुड़ा था, बल्कि खगोलीय गणना के लिहाज से भी महत्वपूर्ण था। प्राचीन भारतीय खगोलशास्त्रियों के लिए उज्जैन समय और तिथियों के निर्धारण का केंद्र था।

इसीलिए आज भी उज्जैन को “भारत का ग्रीनविच” कहा जाता है। जैसे ब्रिटेन के ग्रीनविच को अंतरराष्ट्रीय समय मापन का आधार माना जाता है, वैसे ही प्राचीन भारत में उज्जैन को समय के मापदंड के रूप में लिया जाता था।

आज भी उज्जैन की प्राचीन मंदिर और खगोलीय संर

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