उत्तर प्रदेश में मनरेगा मजदूरी: ग्रामीणों के लिए आजीविका का सहारा

ग्रामीण भारत में आर्थिक स्थिरता और रोजगार सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) एक बेहद महत्वपूर्ण पहल है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण परिवारों के कम से कम एक सदस्य को हर वित्तीय वर्ष में 100 दिनों का गारंटीकृत अकुशल रोजगार प्रदान करना है।

उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में, जहाँ एक बड़ी आबादी कृषि और मजदूरी पर निर्भर है, मनरेगा की भूमिका और भी बढ़ जाती है। सितंबर 2022 के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में मनरेगा के तहत प्रतिदिन की मजदूरी दर 201 रुपये तय की गई थी। उत्तर प्रदेश के साथ-साथ उत्तराखंड में भी यह दर 201 रुपये ही थी। वहीं अन्य राज्यों की बात करें तो तेलंगाना में प्रतिदिन 237 रुपये और त्रिपुरा में 205 रुपये की दर से मजदूरी मिलती थी।

सरकार समय-समय पर बढ़ती महंगाई और जीवन यापन की लागत को ध्यान में रखते हुए मनरेगा मजदूरी दरों में संशोधन करती रहती है। मजदूरी का भुगतान सीधे श्रमिकों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए किया जाता है, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहती है। मनरेगा से न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में परिसंपत्तियों का निर्माण होता है, बल्कि गांवों से शहरों की ओर होने वाले पलायन को रोकने में भी मदद मिलती है।

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