कलयुग में श्राप और आशीर्वाद का असर क्यों नहीं?

हमारे पुराणों और धार्मिक कथाओं में अक्सर श्राप और आशीर्वाद के चमत्कारी प्रभाव का जिक्र मिलता है। त्रेता या द्वापर युग में ऋषि-मुनि का एक शब्द ही किसी के भाग्य को बदल सकता था। लेकिन आज कलयुग में ऐसा क्यों नहीं लगता? इसका एक मुख्य कारण यह है कि इस युग में मनुष्य का धर्म, तप और आध्यात्मिक शक्ति से संबंध कमजोर हो गया है।

तपोबल और ब्रह्म बल की कमी

पहले के युगों में ऋषियों के तप से उत्पन्न ऊर्जा इतनी तीव्र थी कि उनका श्राप या आशीर्वाद तुरंत असर दिखाता था। लेकिन कलयुग में न तो लोग तपस्या करते हैं, न ही धर्म-कर्म में पूरी श्रद्धा रखते हैं। इसके कारण तपोबल और ब्रह्म बल दोनों कमजोर पड़ गए हैं। जब ऋषि या साधु के आशीर्वाद में भी वह शक्ति नहीं रहती, तो फिर उसका प्रभाव भी कम हो जाता है।

इसलिए कहा जाता है कि कलयुग में बाहरी आडंबर कम और आंतरिक शुद्धि ज्यादा जरूरी है। श्राप या आशीर्वाद से ज्यादा महत्व अपने कर

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