काली सरसों: भारतीय रसोई का छोटा लेकिन असरदार मसाला

भारतीय खान-पान में तड़के का एक विशेष महत्व है, और इस तड़के की जान होती है काली सरसों। वनस्पति विज्ञान की भाषा में इसे ब्रासिका निगरा (Brassica nigra) कहा जाता है। ये छोटे, गोल और सख्त बीज गहरे भूरे से लेकर बिल्कुल काले रंग के होते हैं। दिखने में छोटे होने के बावजूद, इनका स्वाद और सुगंध बहुत ही तीखा और मजबूत होता है।

सफेद या पीली सरसों की तुलना में काली सरसों अधिक तीखी और चटपटी होती है। यही वजह है कि दक्षिण भारतीय और उत्तर भारतीय व्यंजनों में इसका इस्तेमाल प्रचुर मात्रा में किया जाता है। जब इन बीजों को गर्म तेल या घी में डाला जाता है, तो ये चटकने लगते हैं और अपनी विशिष्ट महक छोड़ते हैं, जिससे साधारण से साधारण दाल या सब्जी का स्वाद भी कई गुना बढ़ जाता है।

तड़के के अलावा, काली सरसों को पीसकर पाउडर के रूप में या अचार के मसाले में भी इस्तेमाल किया जाता है। इसमें मौजूद प्राकृतिक तेल न केवल भोजन को बेहतरीन स्वाद और स्वाद का संतुलन प्रदान करते हैं, बल्कि यह पाचन के लिए भी काफी फायदेमंद मानी जाती है। संक्षेप में कहें तो, काली सरसों हर रसोई का एक अनिवार्य और गुणकारी हिस्सा है।

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