वे देश जो कभी किसी के गुलाम नहीं बने

दुनिया का नक्शा अगर उठाकर देखें, तो इतिहास में लगभग हर हिस्से पर किसी न किसी साम्राज्य का कब्जा रहा है। लेकिन कुछ ऐसे भी देश हैं जो कभी किसी यूरोपीय शक्ति का औपनिवेशिक गुलाम नहीं बने। हालांकि, "कभी गुलाम न बनने" की परिभाषा को लेकर इतिहासकारों में थोड़ा मतभेद हमेशा रहता है।

एशिया और अफ्रीका में कुछ राष्ट्रों ने अपनी कूटनीति और भूगोल के दम पर अपनी स्वतंत्रता बचाकर रखी। उदाहरण के लिए, इथियोपिया ने 1896 में इटली की सेना को हराकर अपनी संप्रभुता कायम रखी, जबकि थाइलैंड (जिसे पहले सियाम कहा जाता था) ने अंग्रेजों और फ्रांसीसियों के बीच एक सुरक्षित बफर जोन बनकर खुद को बचा लिया।

इसी तरह जापान ने मेजी पुनर्स्थापना के दौरान तेजी से सैन्य और आर्थिक आधुनिकीकरण किया, जिससे पश्चिमी शक्तियां उस पर कब्जा नहीं कर सकीं। नेपाल और भूटान जैसे पहाड़ी देशों ने अपने दुर्गम इलाकों और गोरखा सैनिकों के पराक्रम की बदौलत अपनी स्वायत्तता बनाए रखी। वहीं लाइबेरिया की स्थापना अमेरिका से लौटे मुक्त दासों ने की थी, जिससे यह यूरोपीय उपनिवेशवाद से दूर रहा।

दूसरी ओर, चीन, ईरान (फारस) और टोंगा जैसे देशों को विदेशी शक्तियों के भारी प्रभाव, व्यापारिक दबाव या संक्षिप्त कब्जे का सामना जरूर करना पड़ा, लेकिन औपचारिक रूप से ये कभी किसी साम्राज्य के पूरी तरह गुलाम नहीं बने। मंगोलिया और कोरिया का इतिहास भी क्षेत्रीय शक्तियों के प्रभाव के कारण इतिहासकारों के बीच बहस का विषय बना रहता है।

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय