देवी-देवता का आना: आस्था या अनुभूति?

गांव-गांव में आज भी ऐसी घटनाएं सुनने को मिलती हैं, जहां लोग किसी व्यक्ति के शरीर में देवी या देवता के आने की बात करते हैं। कहीं नाग देवता आते हैं, तो कहीं कोई देवी अपने भक्त के रूप में प्रकट होती है। ये घटनाएं अक्सर तब होती हैं जब कोई व्यक्ति अचानक अलग तरह से बोलने लगता है, अनजान भाषा में बात करता है या ऐसा व्यवहार करता है जो उसके स्वभाव से अलग होता है।

कई लोगों का मानना है कि यह दैवी कृपा है, कोई वरदान। लेकिन कुछ मानते हैं कि यह भूतबाधा या आत्मा का प्रभाव हो सकता है। ऐसे में पीड़ित व्यक्ति को अक्सर किसी पीर की दरगाह या फिर हनुमान मंदिर ले जाया जाता है। वहां पूजा-पाठ, मंत्र या ताबीज के जरिए उस पर चढ़े बुरे प्रभाव को दूर करने की कोशिश की जाती है।

वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो ऐसे मामले मनोवैज्ञानिक स्थितियों या तनाव से जुड़े हो सकते हैं। लेकिन क्षेत्रीय आस्था में इन्हें दैवी अनुभूति माना जात

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