गरीबी की परिभाषा और कैलोरी का पैमाना

गरीबी किसी भी समाज के लिए एक गंभीर चुनौती रही है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर किसी व्यक्ति को गरीब कब माना जाता है? ऐतिहासिक और आधिकारिक तौर पर, हमारे देश में गरीबी तय करने का पैमाना सिर्फ पैसों से जुड़ा नहीं है, बल्कि यह इंसान की बुनियादी जरूरतों, खासतौर पर पोषण से जुड़ा हुआ है।

भारतीय योजना आयोग के तय किए गए आंकड़ों के अनुसार, गरीबी की सीमा को कैलोरी की खपत के आधार पर मापा जाता है। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले हर व्यक्ति के लिए प्रतिदिन 2400 कैलोरी और शहरी क्षेत्रों के लिए प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 2100 कैलोरी का मानक निर्धारित किया गया है।

इस नियम के मुताबिक, जो व्यक्ति अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में इन तय मात्रा से कम कैलोरी वाला भोजन या पोषण प्राप्त कर पाता है, उसे गरीबी रेखा से नीचे यानी बीपीएल श्रेणी में माना जाता है। गांवों में यह कैलोरी सीमा इसलिए अधिक रखी गई है क्योंकि वहां के लोगों को शारीरिक श्रम ज्यादा करना पड़ता है।

हालांकि, वक्त के साथ गरीबी को मापने के तौर-तरीकों में बदलाव आए हैं और अब शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं भी इसमें जोड़ी जाती हैं, लेकिन कैलोरी का यह पैमाना हमारे देश के आर्थिक इतिहास में एक बहुत महत्वपूर्ण आधार रहा है।

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय