कुरान का लेखन और इतिहास

इस्लाम धर्म के अनुसार कुरान अल्लाह द्वारा भेजी गई अंतिम और सर्वोच्च पवित्र किताब है। शुरुआत के दौर में इस महान ग्रंथ का प्रसार मुख्य रूप से मौखिक परंपरा के जरिए हुआ था, क्योंकि पैगम्बर मुहम्मद के अनुयायी इसे सुनकर याद रखते थे।

पैगम्बर मुहम्मद के स्वर्गवास के बाद, ऐतिहासिक और धार्मिक साक्ष्यों के अनुसार, सन 633 ईस्वी में इसे पहली बार लिखित रूप में संकलित करने का महत्वपूर्ण कार्य किया गया। इसके बाद, खलीफा उस्मान के शासनकाल में सन 653 ईस्वी में इस लिखित पाठ को पूरी तरह से मानकीकृत (Standardize) किया गया।

मानकीकरण की यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद, इसकी आधिकारिक प्रतियों को तैयार करके विशाल इस्लामी साम्राज्य के अलग-अलग प्रांतों में वितरित कर दिया गया, ताकि पूरे साम्राज्य में कुरान का पाठ एक ही रूप में पढ़ा जा सके। यह इतिहास इस बात का प्रमाण है कि इस पवित्र ग्रंथ के संरक्षण के लिए शुरुआती मुसलमानों ने कितनी सावधानी और निष्ठा के साथ कार्य किया था।

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