श्रीकृष्ण के माता-पिता और उनका जन्म
भारतीय इतिहास और पुराणों में भगवान श्रीकृष्ण का चरित्र अत्यंत अलौकिक और प्रेरणादायी माना गया है। जब भी उनके जन्म की बात आती है, तो एक गहरा आध्यात्मिक और ऐतिहासिक संदर्भ सामने आता है। पौराणिक मान्यताओं और श्रीमद्भागवत महापुराण के अनुसार, श्रीकृष्ण के जैविक पिता वासुदेव और माता देवकी थीं। वे उनकी आठवीं संतान के रूप में इस धरती पर अवतरित हुए थे।
द्वापरयुग में मथुरा नगरी पर भोजवंशी राजा उग्रसेन का शासन था। राजा उग्रसेन का एक अत्यंत क्रूर और अत्याचारी पुत्र था, जिसका नाम कंस था। कंस ने अपने पिता को गद्दी से हटाकर खुद को मथुरा का राजा घोषित कर दिया था। देवकी कंस की चचेरी बहन थीं, जिससे वह बहुत स्नेह करता था। लेकिन देवकी के विवाह के समय एक आकाशवाणी हुई कि देवकी की आठवीं संतान ही कंस के विनाश का कारण बनेगी। इस भय से कंस ने अपनी बहन देवकी और बहनोई वासुदेव को कारागार में डाल दिया।
कंस के कड़े पहरे और अत्याचारों के बीच, भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को आधी रात के समय मथुरा के इसी कारागार में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। हालांकि, उनका पालन-पोषण गोकुल में नंद बाबा और माता यशोदा की देखरेख में हुआ, इसलिए उन्हें नंदलाल भी कहा जाता है। वासुदेव जी ने अत्याचारी कंस से बचाने के लिए नवजात शिशु को चुपचाप गोकुल पहुंचा दिया था। इस प्रकार, वासुदेव जी श्रीकृष्ण के जन्मदाता पिता और नंद बाबा उनके पालनहार पिता कहलाए।
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