श्रीकृष्ण के श्याम वर्ण का पौराणिक रहस्य

सनातन धर्म में भगवान श्रीकृष्ण के रूप और उनके आकर्षण की अनेक कथाएं प्रचलित हैं। अक्सर लोग यह जानने के उत्सुक रहते हैं कि श्रीकृष्ण का रंग काला या श्याम क्यों था? इसके पीछे एक बेहद दिलचस्प और चमत्कारिक पौराणिक कथा का वर्णन मिलता है, जो हमें सृष्टि के संचालक भगवान विष्णु की लीलाओं से जोड़ती है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब कंस के अत्याचारों से पृथ्वी त्रस्त थी, तब धर्म की स्थापना के लिए भगवान विष्णु ने अवतार लेने का निश्चय किया। इस संदर्भ में एक कथा कहती है कि भगवान विष्णु ने माता देवकी के गर्भ में दो बाल रोपे थे, जिनमें से एक बाल काले रंग का था और दूसरा सफेद रंग का। बाद में एक चमत्कारिक घटनाक्रम के तहत इन दोनों ही बालों को रोहिणी के गर्भ में स्थानांतरित कर दिया गया।

इसके परिणामस्वरूप, उस काले रंग के बाल से श्याम वर्ण के श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, जिन्हें उनके सांवले और मनमोहक रूप के कारण घनश्याम भी कहा गया। वहीं दूसरी ओर, सफेद रंग के बाल से उनके बड़े भाई बलराम जी का जन्म हुआ, जो अपने अत्यंत गौर वर्ण के लिए जाने जाते हैं। श्रीकृष्ण का यह सांवला रंग केवल एक शारीरिक विशेषता नहीं, बल्कि अनंत ब्रह्मांड और उनकी अगाध महिमा का प्रतीक माना जाता है।

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