भगवान श्रीकृष्ण की आयु और उनका धरती पर समय

सनातन धर्म में भगवान श्रीकृष्ण का चरित्र और उनका जीवन काल हमेशा से ही गहरी श्रद्धा और कौतूहल का विषय रहा है। महाभारत और विभिन्न पौराणिक शास्त्रों के विवरणों के अनुसार, द्वापर युग के अंत में भगवान श्रीकृष्ण ने इस धरती पर अवतार लिया था। वे मानव रूप में इस पृथ्वी पर कुल 125 वर्ष तक रहे। अपने इस पावन जीवन काल में उन्होंने अधर्म का नाश कर धर्म की स्थापना की और कुरुक्षेत्र की भूमि पर गीता का अमर संदेश दिया।

यदि हम ज्योतिषीय गणनाओं और शास्त्रों के संदर्भों को देखें, तो उनके गोलोक धाम प्रस्थान के तुरंत बाद से ही कलयुग का प्रारंभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं और काल गणना के अनुसार, श्रीकृष्ण के पृथ्वी छोड़ने के बाद से अब तक लगभग 5117 वर्ष का समय बीत चुका है। जब हम उनके पृथ्वी पर प्रत्यक्ष रूप से बिताए गए 125 वर्षों में इस समय को जोड़ते हैं, तो एक अत्यंत महत्वपूर्ण आंकड़ा सामने आता है।

इस पारंपरिक गणना के आधार पर, भगवान श्रीकृष्ण इस वर्ष धरती पर अपने जीवन काल की शुरुआत से लेकर अब तक कुल 5242 वां वर्ष पूर्ण कर रहे हैं। यह संख्या न केवल उनके ऐतिहासिक और आध्यात्मिक अस्तित्व की गहराई को दर्शाती है, बल्कि भक्तों को उनके दिव्य युग की प्राचीनता का अहसास भी कराती है। सदियाँ बीत जाने के बाद भी श्रीकृष्ण के विचार, उनकी लीलाएं और उनका मार्गदर्शन आज भी मानव समाज के लिए उतने ही प्रासंगिक और जीवंत हैं।

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