दक्षिण एशिया में चीनी कर्ज का बढ़ता बोझ
दक्षिण एशियाई देशों में चीन का आर्थिक प्रभाव और कर्ज का जाल लगातार गहराता जा रहा है। हालिया रिपोर्टों और फोर्ब्स के आंकड़ों के अनुसार, इस क्षेत्र के कई देश भारी चीनी कर्ज के तले दबे हुए हैं। इनमें सबसे प्रमुख नाम पाकिस्तान, श्रीलंका और मालदीव के हैं।
चीन का सबसे बड़ा कर्जदार पाकिस्तान है, जिस पर चीन का लगभग 77.3 अरब डॉलर का बाहरी कर्ज बकाया है। बुनियादी ढांचे और विकास परियोजनाओं के नाम पर लिया गया यह कर्ज पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा संकट बन चुका है।
दूसरी ओर, द्वीपीय राष्ट्र मालदीव की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है। मालदीव पर चीन का कर्ज उसकी सकल राष्ट्रीय आय (GNI) का 31 प्रतिशत हो चुका है, जिससे देश की आर्थिक स्थिरता पर जोखिम बढ़ गया है।
इसके साथ ही श्रीलंका भी चीनी कर्ज के भारी बोझ तले दबा हुआ है। कई विशेषज्ञ इसे चीन की 'कर्ज जाल नीति' (Debt-Trap Diplomacy) का परिणाम मानते हैं, जिसके कारण ये देश अपनी आर्थिक संप्रभुता और वित्तीय संतुलन को बनाए रखने में गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दें।