बौद्ध धर्म और मूर्ति पूजा: हीनयान की परंपरा

बौद्ध धर्म दुनिया के सबसे प्राचीन और दर्शन से परिपूर्ण धर्मों में से एक है। इसकी शिक्षाएँ मुख्य रूप से भगवान बुद्ध के विचारों और जीवन मूल्यों पर आधारित हैं। समय के साथ बौद्ध धर्म दो प्रमुख शाखाओं में विभाजित हो गया: हीनयान और महायान। इन दोनों शाखाओं के सिद्धांतों और पूजा पद्धतियों में काफी अंतर देखने को मिलता है।

यदि यह सवाल पूछा जाए कि बौद्ध धर्म का कौन सा अंग मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं करता, तो इसका उत्तर हीनयान है। हीनयान संप्रदाय बुद्ध की मूल शिक्षाओं का कड़ाई से पालन करता है। इस परंपरा में बुद्ध को एक अलौकिक ईश्वर नहीं, बल्कि एक महान मार्गदर्शक और महापुरुष माना गया है। यही कारण है कि हीनयान अनुयायी मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं करते।

इसके विपरीत, वे बुद्ध के बताए गए आर्य सत्य और अष्टांगिक मार्ग पर चलने को ही साधना का सच्चा रूप मानते हैं। हीनयान परंपरा में आत्म-अनुशासन, ध्यान और आत्म-ज्ञान को ही जीवन का मुख्य ध्येय माना गया है।

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