कर्म और उसका फल

हर कर्म का एक फल होता है — यह सिर्फ धार्मिक बात नहीं, बल्कि जीवन का सच है। जैसा बोओगे, वैसा काटोगे। भगवान बुद्ध ने स्पष्ट कहा कि अच्छे कर्मों का परिणाम हमेशा अच्छा और बुरे कर्मों का परिणाम बुरा ही होता है। यह नियम न सिर्फ आध्यात्मिक जीवन में, बल्कि रोजमर्रा के अनुभवों में भी साबित होता है।

मान लीजिए कोई व्यक्ति मदिरा पीता है। उसका यह कर्म उसी के शरीर और मन पर असर डालता है। नशा, स्वास्थ्य को बिगाड़ता है, रिश्तों में तनाव आता है, और जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। यह फल सीधे उसी कर्म से जुड़ा है। किसी और को नहीं भुगतना पड़ता।

इसी तरह, जो व्यक्ति प्रेम, सत्य और दया के साथ जीता है, उसके जीवन में शांति और सम्मान आता है। वह दूसरों की मदद करता है, तो जरूरत पड़ने पर लोग उसके साथ खड़े होते हैं। अच्छे कर्मों का फल धीरे-धीरे तो मिलता ही है, कई बार तुरंत भी मिल जाता है।

इसलिए, अपने कर्मों पर ध्यान देना जरूरी है। न तो भ

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